प्रत्यक्ष कर- केंद्रीय बजट 2022-23 की मुख्य बातें

प्रत्यक्ष कर- केंद्रीय बजट 2022-23 की मुख्य बातें स्थिर एवं संभावित कर व्यवस्था संबंधी नीति को आगे बढ़ाया जाएगा : विश्वसनीय कर व्यवस्था स्थापित करने का दृष्ट...

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प्रत्यक्ष कर- केंद्रीय बजट 2022-23 की मुख्य बातें

स्थिर एवं संभावित कर व्यवस्था संबंधी नीति को आगे बढ़ाया जाएगा :
  • विश्वसनीय कर व्यवस्था स्थापित करने का दृष्टिकोण।
  • कर प्रणाली को सरल बनाना और मुकदमेबाजी को कम करना।
नई ‘अद्यतनीकृत विवरणी’ का चलन शुरू करना
  • अतिरिक्त कर की अदायगी करके अद्यतन विवरणी दाखिल करने के लिए नया प्रावधान।
  • करदाता को आय के आकलन में की गई गलतियों को सुधार कर अद्यतन विवरणी दाखिल करने का अवसर मिलेगा।
  • अद्यतन विवरणी संबंधित आकलन वर्ष के अंत से दो वर्षों के भीतर दाखिल की जा सकती है।
सहकारी समितियां
  • सहकारी समितियों के लिए वैकल्पिक न्यूनतम कर भुगतान को 18.5 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत किया गया।
  • सहकारी समितियों और कंपनियों के लिए समान अवसर उपलब्ध होंगे।
  • उन सहकारी समितियों के लिए अधिभार की मौजूदा दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया, जिनकी कुल आमदनी एक करोड़ रुपये से अधिक और 10 करोड़ रुपये तक है।
दिव्यांगजनों को कर राहत
  • दिव्यांग आश्रितों को उनके माता-पिता/अभिभावकों के जीवनकाल के दौरान यानी माता-पिता/अभिभावकों के साठ वर्ष की आयु प्राप्त करने पर भी बीमा योजनाओं से वार्षिकी और एकमुश्त राशि की अदायगी की अनुमति।
राष्ट्रीय पेंशन योजना के योगदान में समानता
  • राज्य सरकार के कर्मचारियों के एनपीएस खाते में नियोक्ता के योगदान पर कर कटौती की सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने का प्रस्ताव।
  • इससे राज्य सरकार के कर्मचारियों को केन्द्रीय कर्मचारियों के समान सुविधा प्रदान करने में मदद मिलेगी।
  • राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहन
  • कर प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए पात्र स्टार्टअप के निगमन की अवधि को एक साल बढ़ाकर 31.03.2023 तक करने का प्रस्ताव।
  • पहले निगमन की अवधि 31.03.2022 तक वैध।
रियायती कर व्यवस्था के अंतर्गत प्रोत्साहन
  • धारा 115बीएबी के तहत विनिर्माण एवं उत्पादन शुरू करने की अंतिम तिथि को एक साल के लिए यानी 31 मार्च, 2023 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2024 कर दिया गया है।
वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों के कराधान के लिए योजना
  • वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए विशेष कर प्रणाली लागू की गई।
  • किसी भी वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्ति के हस्तांतरण से होने वाली आय पर कर दी दर 30 प्रतिशत होगी।
  • इस प्रकार की आय की गणना करते समय अधिग्रहण लागत को छोड़कर को किसी भी खर्च अथवा भत्ते के लिए कटौती नहीं होगी।
  • वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्ति के हस्तांतरण से हुए नुकसान की भरपाई किसी अन्य आय से नहीं की जा सकती।
  • लेन-देन के विवरण के लिए वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्ति के हस्तांतरण के संबंध में किए गए भुगतान पर एक निश्चित मौद्रिक सीमा से ऊपर की रकम के लिए 1 प्रतिशत की दर से टीडीएस देय होगा।
  • वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्ति के उपहार पर भी प्राप्तकर्ता के यहाँ कर देय होगा।
मुकदमा प्रबंधन
  • यदि किसी मामले में कानून उसी तरह का हो जिससे संबंधित कोई मामला उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हो तो विभाग द्वारा अपील दायर करने की प्रक्रिया को अदालय द्वारा उस कानून के संबंध में फैसला दिये जाने तक टाल दिया जाए।
  • करदाताओं और विभाग के बीच दोहरायी जाने वाली मुकदमेबाजी को कम करने में इससे काफी मदद मिलेगी।
आईएफएससी को कर प्रोत्साहन
  • निम्नलिखित को निर्धारित शर्तों के साथ कर से छूट प्रदान की गई :
  • विदेशी डेरीवेटिव प्रपत्रों से किसी प्रवासी को कोई आमदनी।
  • किसी विदेशी बैंकिंग इकाई द्वारा जारी काउंटर डेरीवेटिव्स से होने वाली आय।
  • जहाज के पट्टे से मिली रायलटी एवं ब्याज आय।
  • आईएफएससी में पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं से प्राप्त आय।
अधिभार का यौक्तिकीकरण
  • एओपी (अनुबंध के निष्पादन के लिए गठित कंसोर्टियम) पर अधिभार की उच्चतम सीमा 15 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
  • व्यक्तिगत कंपनियों और एओपी के बीच अधिभार में अंतर को कम किया गया है।
  • किसी भी प्रकार की परिसंपत्ति के हस्तांतरण से होने वाले दीर्घावधि पूंजीगत लाभ पर अधिभार की अधिकतम सीमा 15 प्रतिशत होगी।
  • इससे स्टार्ट-अप समुदाय को नुकसान मिलेगा।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर
  • आय और मुनाफे पर किसी भी अधिभार अथवा उपकर को कारोबारी खर्च की श्रेणी में रखने की अनुमति नहीं होगी।
कर-वंचन की रोकथाम
  • तलाशी एवं सर्वेक्षण कार्रवाइयों के दौरान पता लगे और प्रकट आए के संबंध में किसी भी प्रकार की हानि के प्रति समंजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
टीडीएस प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाना
  • कारोबार को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत हित लाभ एजेंटों के हाथों में कर योग्य होते है, इसलिए लाभ एजेंटों तक अग्रसारित किया जाएगा।
  • हित लाभ देने वाले व्यक्ति द्वारा कर कटौती के लिए उपबंध करने का प्रस्ताव होगा, बशर्ते वित्त वर्ष के दौरान ऐसे हितलाभों का कुल मूल्य 20,000 रुपये से अधिक न हो।
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